
चाँद की चाँदनी और सूरज की किरन है दुआ,
सागर की मौज और पवन की मस्ती है दुआ,
आह की कम्पन और ऑंसू की नमी है दुआ,
हँसी की खुशी और दिल की धड़कन है दुआ,
दर्द की दवा और रात की सुबह है दुआ,
……… दुआओं का सिलसिला तो चलते ही रहना चाहिए, यह ताना-बाना तो यूंही बना ही रहना चाहिए, क्योंकि, दुआएं जितनी बिखेरते हैं उससे बढ़ कर ही हम बटोरते हैं ……।
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