अरूणोदय

आँखों से आंसू ज़रूर बहेंगे, पर हम मुस्कुरा कर हर ग़म सहेंगे,

अंगारों पर हम चलते चलेंगे, पर सत्य की राह से न हम कभी डिगेंगे,

हम हर दर्द हँस कर सहेंगे, और गिला न कभी भी किसी से करेंगे,

दुखों के बादल घनेरे चाहे कितने ही घिरेंगे, हम फिर भी विश्वास पर अपने अटल रहेंगे,

प्रभु पथ पर चलते-चलते अंधेरों के साय तो अनगिनत मिलेंगे, हाँ मगर एक दिन उजालों के दीप भी ढेरों जलेंगे,

अंधियारी रातों में तारों के झुरमुट हर ओर दिखेंगे, वीरान सहराओं में भी अनेको फूल खिलेंगे, इन अनदेखी-अनजानी राहों से हो के ही ईश्वर हमें हर सूरत, हर कीमत मिलेंगे।

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