प्रार्थना

सर पे कड़कती धूप हो या हो ठण्डी छांव, फूल पे पड़े या कांटों से छिले हों अपने पाँव, आंधियों से घिरी हो या शांत किनारे लगी हो अपनी नाव……..हमें है न कोई डर, न कोई फिकर, क्योंकि इस बात की है हमे सच्ची खबर की……..हमारे सर पे है तेरा हाथ, हर क्षण है तेरा साथ, तो फिर भय की है न कोई बात, तू सम्भालेगा हमे, चाहे जैसे भी क्यों न हो हालात…….. हे ईश्वर, यूं ही तू हम पे अपनी अनुकम्पा बनाए रखना, हम चाहे कितनी ही क्यों न करें भूल तू सदा ही हमे क्षमा करते रहना, हमे अपना नादान बालक जान ऐसे ही हमेशा हमारे साथ बस चलते चलना।

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