
सुख-दुख के ऊंचे-नीचे रास्तों से गुज़र कर ही हम सत्य के शिखर तक पहुँचते हैं।
जो कुछ करना है सो अभी ही कर लें, कहीं ऐसा न हो, की कल को बचाने के लिए कुछ बचे ही नहीं।
बदला न लें, आप ही बदल जाएं, यह दुनिया खुद- ही- खुद बदली-बदली सी लगेगी।
किसी की खुशी का कारण बनें, अपना मन स्वतः खुशी से भर जाएगा।
जीवन में कंकड़-पत्थरों का ढेर न लगने दें, चंद अनमोल रत्न ही अपने आस-पास रहने दें।
लौकिक अस्तित्व से भिन्न हमारा एक अलौकिक स्वरूप भी है, इसे भी पहचानने की चेष्टा करें, स्वयं को अपनी सम्पूर्णता मे जानने का प्रयास करें।
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