दिव्य दर्शन

……….मैं भूखा था, उसने मुझे खाना खिलाया, मैंने उसमें प्रभु को पाया ……..मैं प्यासा था, उसने मुझे पानी पिलाया, मैंने उसमें प्रभु को पाया……… मैं बीमार था, उसने सर पे हाथ फिराया…….. मैंने उसमें प्रभु को पाया…….. मैं उदास था, उसने मुझे खूब हँसाया, मैंने उसमें प्रभु को पाया ……… मैं अकेला था, उसने मेरा साथ निभाया…….. मैंने उसमें प्रभु को पाया………. मैं भटका था, उसने मुझे रास्ता दिखाया……… मैंने उसमें प्रभु को पाया……..

…………………. आज…….. मैंने प्रभु को पाया।

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