
हम ईश्वर की सुनेंगे तो वे हमारी सुनेंगे, हम उनकी करेंगे तो वे हमारी करेंगे, हम एक कदम बढ़ाएंगे तो वे सौ कदम बढ़ाएंगे।
हम सभी को अपने भाग्य का भुगतान खुद ही करना है, अकेले आए हैं और अकेले ही जाना है।
जैसे-जैसे हम पे दुखों के पहाड़ टूटते चले जाते हैं, वैसे- वैसे ही हमारे पापों के बोझ भी कम होते जाते हैं।
अंधेरी रातों के दीपक, पत्थरिली राहों के फूल, तपती धूप की छांव, तूफानों के किनारे, आंधियों के आश्रय, ईश्वर हर घड़ी, हर क्षण, हर परिस्थिति में हमेशा हमारे साथ हैं।
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