नवकृति

ढलते हैं जगमगाने के लिए,

ढहते हैं बंधने के लिए,

मिटते हैं नवरूप लेने के लिए,

टूटते हैं बनने के लिए,

पिघलते हैं सांचे में ढलने के लिए,

जलते हैं कुन्दन होने के लिए,

बिगड़ते हैं संवरने के लिए,

बिखरते हैं निखरने के लिए।

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