
जीवन अंधकार और प्रकाश का खेल है, सांझ और सवेरे का यह मेल है,
इस बगिया में कांटों संग फूल हैं, यहाँ होते हर दम संग शबनम और शूल हैं,
कभी अमावस तो कभी चाँदनी रात है, जीवन में जलना-बुझना सदा ही एक साथ है,
पतझड़ लाती हमेशा अपने आंचल में बहार है, आखिर, ऐसे ही संगम से तो होता जीवन का श्रृंगार है।
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