
जीवन में द्वंद परिवर्तन से नहीं बल्कि परिवर्तन के विरोध से होता है, चाहे वह परिवर्तन किसी भी प्रकार का ही क्यों न हो। परिवर्तन ही प्रकृति का नियम है। इसीलिए, विचारों में लचीलापन लाएं और परिवर्तन को सहजता से स्वीकारें। जीवन को बासी होने से बचाएं, परिवर्तन की हवाओं के साथ उड़ते रहें, इस नदिया के साथ बहते रहें, जीवन में ताज़गी और बहार बनाए रखें।
हम सबसे भाग सकते हैं, सभी से झूठ कह सकते हैं, परंतु खुद से कहाॅ भागेंगे, स्वंय से सत्य कैसे छिपाएंगे? इसीलिए, मन साफ़ रखें, मन हल्का रखें। जानते-बूझते कभी कुछ गलत न करें , न ही कभी किसी असत्य का साथ दें, कभी छोटे रस्ते से बच के निकलने की कोशिश न करें, क्योंकि ऐसा करने से हम अपने दुख-दर्द दोगुना बढ़ा लेते हैं। अपनी अंतरआत्मा की पुकार सुने,हर परिस्थिति का डट कर, साहस से, ईश्वर पर विश्वास रखते हुए शुद्ध भावना से सामना करें।
एक बच्चे को यह दुनिया बिल्कुल नई जान पड़ती है, एक युवा के लिए यही दुनिया सम्भावनाओं से भरी पड़ी है। किसी मध्यवय व्यक्ति के लिए यह उपलब्धियों का अम्बार है, तो वहीं किसी बुज़ुर्ग के लिए जानी-पहचानी व यादों और अनुभवों का खज़ाना है। बचपन, यौवन, मध्यवय, वृद्धावस्था हर एक के जीवन का हिस्सा है। अपने-अपने समय से हर एक को इससे हो के गुज़रना है। परन्तु इस लोक का सौंदर्य यह भी है की,एक ही समय में यहाँ कोई बच्चा है तो कोई वृद्ध, और एक ही वक्त में हर एक अपनी -अपनी अवस्था व परिस्थिति के ऐनक से इस जगत को देख रहा है, टटोल रहा है, अनुभव कर रहा है। यही तो इस जग की खूबी है, खासियत है, की एक ही पल में एक और अनेक यहाँ साथ-साथ बसर करते हैं।
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