
जहाँ मिलेगा सहने को न फिर रहेगा वहाँ कुछ भी कहने को, ठहरे हुए पानी को बस वहीं रहने दो, जीवन को एक नया रुख लेने दो, ज़िंदगी के सफ़र को न ही कहीं भी थमने दो, यह तो नदिया है इसे उन्मुक्त बहने दो, जो दूर कहीं पीछे रह गए उनको सिर्फ दुआएं दो और यूंही, बढ़ते बढ़ो……. बस चलते चलो ……..
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