
फ़ासले इतने न बढ़ें की कभी मिटने न पाएं, खाइयां इतनी गहरी न हो की कभी भरने न पाएं,
रातें इतनी काली न हों की कभी सवेरा होने न पाए, बादल इतने घनेरे न हो की कभी छटने न पाएं,
शामें इतनी लम्बी न हों की कभी ढलने न पाएं, पहाड़ियां इतनी हठी न हों की कभी हटने न पाएं,
ज़िंदगी पल दो पल की है, दूरियां इतनी न हों की कभी फिर मिलने न पाएं,
चलो आज एक दसरे की ओर दोस्ती का हाथ बढ़ाएं, गिले-शिकवे सभी भुलाएं, यह ज़िन्दगानी का सफ़र हँसी-खुशी साथ बिताएं।
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