
जो है हर क्षण प्रभु के प्रभाव में, न रहने देते हैं वे उसे किसी भी अभाव में,
जिसकी ज़िन्दगी गुज़रती है ईश्वर से लगाव में, वह न टूटता है दुनिया के दबाव में,
हर एक जो रहता है अपने सच्चे स्वभाव में, वह न बिखरता है लोगों के तनाव में,
जब भगवन स्व्यं खड़े हैं हमारे बचाव में, तो फिर कैसे आएंगे हम अन्यों के झुकाव में?
मनुष्य जन्म सार्थक वही है जो रहे तो संसार में, पर जीवन हो व्यतीत प्रभु प्रेम की ठण्डी छांव में।
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