
बोतल पूरी भरी है या खाली दूर से एक समान ही दिखती है। लेकिन जब ठोकर लगती है तब खाली बोतल लड़खड़ा के बिखर जाती है और भरी हुई बोतल सम्भल के निखर जाती है।
मन जब-जब भटक जाए तब-तब इसको सांसों की डोर से बांध लेना चाहिए, धीर-धीर मन स्थिर व शांत होने लग जाएगा। हर आती हुई सांस के साथ नई ऊर्जा व सकारात्मकता आएगी और जाती हुई सांस अपने साथ उदासी व नकारात्मकता ले जाएगी।
स्वरों के सागर में डूब के ही ज़िंदगी के सुर तलाशने हैं, ताल कभी भी रुकती नहीं है और अगर कहीं गलती से हम रुक गए तो फिर जीवन संगीत बेसुरा हो जाता है, इसीलिए, जीवन की सुर, ताल व लय बनाए रखने के लिए हमेशा ही चलते रहें, बढ़ते रहें।
जब कभी भी निराशा के बादल घिरने लगें तब सिर्फ इतनी सी बात याद रखने वाली होती है की इंसान तो भले ही बदल सकते हैं मगर ईश्वर न ही कभी बदले हैं और न ही कभी भी बदलेंगे, वे हमारे सच्चे मित्र व परमपिता हैं और हमेशा ही हमारे साथ रहेंगे, प्रभु के घर में भले ही देर हो सकती है मगर अंधेर नहीं।
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