हीरे – मोती

आंसू …….जो गिर जाए सो बून्द, जो रूक जाए सो मोती…….

……..जो बह जाए सो धूल, जो थम जाए सो फूल……….

…….जो छलक जाए सो बाती, जो ठहर जाए सो ज्योति….

…….जो बिखर जाए सो शूल, जो सिमट जाए सो शबनम,

…….जो बह जाए सो अंगारे, जो रह जाए सो कलियां छोटी-छोटी…….

…….जो निकल जाए सो पत्थर ,जो बच जाए सो हीरा…….

…….. जो दिख जाए सो सहानुभूति, जो छिप जाए को नमन कोटी-कोटी।

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