
सब चीज़ें हमेशा अपने बस में नहीं होती, हर किसी की अपनी कुछ बेबसी कूछ लाचारी ज़रूर ही है होती,
यह समझना ही तो दोस्ती के हैं अनमोल मोती, शुभचिंतकों के मन में एक-दसरे के लिए दुआओं की कलियां महकती हैं हमेशा ही छोटी-छोटी,
करूना की किरने लाती है अंधकार में ज्योति, हर किसी की आखियां हैं कभी हँसती तो कभी रोती, हर एक को है नमन कोटी-कोटी।
Leave a comment