दया और दुआ

कांटों मे ही फूल खिलते हैं, रातों में ही तारे दिखते हैं,

धुंधयारों से हो कर उजियारे मिलते हैं, अंधेरों मे ही विश्वास के दीप जलते हैं,

कठिनाइयों मे ईश्वर हर पल हमारे साथ चलते हैं, यूं ही हम औरों के भी दुख-दर्द समझते हैं,

मन में सब के लिए दया-करूणा के मोती बसते हैं, ह्रदय में सहानुभूति के फूल सदा ही महकते हैं,

यही उम्मीद हम सभी से रखते हैं की हमारी दुआएं सब कबूल करते हैं।

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