मन मनन

कभी सोचेंगे तो हम समझ पाएंगे की जीवन में दुख, चुनौति, निराशा एक उदेश्य के लिए आते हैं। हर दुख में धैर्य, चुनौति में साहस, निराशा में ढाढस हमे परमपिता परमेश्वर से ही प्राप्त होते हैं। वे ईश्वर ही है जो हर परिस्थित में हमारे साथ रहते हैं, चाहे अन्य कोई और हो या न हो। जीवन एक यात्रा है, प्रभु इसका लक्ष्य, जीवन एक शोध है, भगवन इसकी खोज। दुख-दर्द, उदासी-मायूसी, उतार-चढ़ाव, यह सब वह सीढ़ियां हैं जो परमात्मा तक पहुंचने में हमारी सहायता करते हैं, क्योंकि, यह सभी विपरीत परिस्थितियां हमे दैविय गुण सिखाते हैं, जैसे संय्यम, सहिष्णुता, संतुलन, समझदारी, हिम्मत व निर्भयता और ईश्वर के निकट ले आते हैं। इसीलिए, कठिनाइयों के दौरान और अप्रत्याशित विपत्ति के समय में हमे नउम्मीद नहीं होना चाहिए। प्रभु में विश्वास बनाए रख कर और अपनी अंतरआत्मा की पुकार सुनते हुए जीवन पथ पर निरंतर आगे बढ़ते रहना चाहिए, ईश्वर स्वंय हमारा मार्गदर्शन करेंगे, वे स्वंय आ कर हम से मिलेंगे, आखिर, कांटों मे रह कर ही तो यह दिव्य फूल खिलेंगे।

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