दिव्य दीप

कुछ ऐसी है मन की बनावट, की हमारे ही अंदर हैं दोनों देवता और दानव,

यूं है कुछ इस जीवन की रीत, की खुद में ही है हमारी हार और जीत,

ऐसे करना है यूं इस जीवन पथ का चयन,की जहाँ हो बुराइयों का दमन और अच्छाइयों को हो सत-सत नमन,

अब भला कैसे हो यह चुनाव, तो इस के लिए है एक सरल सुझाव,

जब जीवन में ज्ञान के दीप जलेंगे और मन के अंधेरे मिटेंगे, तभी तो हम जीवन में सदा सत्य के मार्ग पर अडिग चलेंगे।

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