साधना

जीवन ही है एक पूजा, इससे बड़ा न तप कोई है दूजा,

इसमें सत्य ही है साध्य और सत्य ही है साधना, इसकी ही करनी है हर क्षण हमे उपासना,

भले ही इस पथ पर पग में कितने ही कांटे चुभे या कंकड़, सहेंगे हर दर्द हम हंस कर,

कड़कड़ाती सर्द हवाओं में जम कर या फिर चिलचिलाती धूप में तप कर, हम पहुंचेंगे ही एक न एक दिन प्रभु के दर पर,

इश्वर की दिव्य छांव में, मरहम लगेगा हमारे हर एक घाव में, और भरेगा हर ज़ख्म इन रूहानी फ़िज़ाओं में,

जो कोई भी आयगा यहाँ ले के भीगी पलकें और होटों पे प्यास, पूरी होगी उसकी हर अधूरी आस,

यहाँ होगा जो हमारा और प्रभु का मिलन, तो न होगा दोबारा इसमें कभी भी कोई भी विघटन,

यहाँ मिलेगा हर भटके को सहारा, हर डूबते को किनारा, क्योंकी, यही है एक मात्र सच्चा आसरा हमारा,

सच तो यह है, की, यहाँ मिलेगी हमे वह राहत, जिसकी थी हमे जन्मों से चाहत।

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