
दीपक की ज्योति में, फूलों की खुशबू में,
सागर की लहरों में, सूरज की गर्मी में,
चाँद की किरनों में, माटी की नरमी में,
वृक्षों की छांव में, इन्द्रधनुष की छटाओं में,
आसमान की अनन्ता में, आती-जाती सांसों की माला में,
वे जो है समाया हर कण-कण में, हम सब में,
गद-गद हैं आज आ के उसकी दिव्य छात्र-छाया में,
नतमस्तक हैं हम पा के उसी परमात्मा को अपनी आत्मा में।
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