क्षितिज

……..कहना तो सबको को आता है, सहा तो कम ही से जाता है……

……..कौन बहाए नीर, जब हो, पराई पीर…….

…….. कहने वाले तो बहुत दिखते हैं, करने वाले, तो कम ही मिलते हैं…….

……..आंसुओ की गंगा बहती है, तब जा कर प्रभु चरणों की शोभा बनती है….

……..सब हो न हो, रब है, और रब है तो सब है…….

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