तारों की छांव में

सागर की लहरें, आसमान के तारे, पेड़ों के पत्ते,

हवाओं के वेग, माटी की खुशबू, फूलों की सुगंध,

सूरज की गर्मी, चन्द्रमा की ठण्डक, आकाश की विशालता,

……..यह सभी ईश्वर की कृतियां हैं, और इन सभी कृतियों के यह दिव्य गुण हैं, जिनका हम वास्स्तविक स्पर्श नहीं कर सकते, गिन नहीं सकते, तौल नहीं सकते, माप नहीं सकते, अपितु, इनका अनुभव अवश्य कर सकते हैं। ठीक इसी प्रकार, जब हम संसार के प्रपंच और प्रदूषण से खुद को मुक्त कर लेते हैं, तब हम, शुद्ध अंतःकरण से ईश्वर की दया, कृपा और उपस्थिति की अनुभूति कर पाते हैं। जीवन में यूं भी कभी होता है, की हम जब स्वयं को अकेले व असहाय पाते हैं, तब प्रभु ही हमारी सबसे बड़ी शक्ति व सहारा बन के सामने आते हैं, वे ही हमे हर समस्या और परिस्थिति से निबटने का साहस व सूझबूझ प्रदान करते हैं, जिससे शायद हम पहले परिचत न थे, और यूं अपने जीवन में हमे ईश्वर की उपस्थिती का एक और सजीव उदाहरण मिलता है।

एक शाश्वत सत्य यह भी है, की, प्रभु की इन पवित्र अनुभूतियों से व अमूर्त उपस्थिती से ही हम हैं, यह कायनात है, और यह नहीं, तो कोई नहीं, कुछ नहीं।

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