
जो स्वयं पर विजय प्राप्त करते हैं, वे ईश्वर का सानिध्य प्राप्त करते हैं……
जब ध्यान संसार से हटता है, तब भगवान में स्वतः ही लगता है…….
संसार में इच्छाएं जितनी बुझती हैं, प्यास उतनी ही बढ़ती है, प्रभु के घर में तृप्ति की वर्षा बरसती है…..
जब हम स्वयं को एकांत में खोते हैं, तब ईश्वर हमारे साथ होते हैं, और अब के बाद हम एक से अनन्त बन, परिपूर्ण होते हैं …..
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