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क्षितिज

……..कहना तो सबको को आता है, सहा तो कम ही से जाता है……
……..कौन बहाए नीर, जब हो, पराई पीर…….
…….. कहने वाले तो बहुत दिखते हैं, करने वाले, तो कम ही मिलते हैं…….
……..आंसुओ की गंगा बहती है, तब जा कर प्रभु चरणों की शोभा बनती है….
……..सब हो न हो, रब है, और रब है तो सब है…….
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मन की किताब

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नमन

दीपक की ज्योति में, फूलों की खुशबू में,
सागर की लहरों में, सूरज की गर्मी में,
चाँद की किरनों में, माटी की नरमी में,
वृक्षों की छांव में, इन्द्रधनुष की छटाओं में,
आसमान की अनन्ता में, आती-जाती सांसों की माला में,
वे जो है समाया हर कण-कण में, हम सब में,
गद-गद हैं आज आ के उसकी दिव्य छात्र-छाया में,
नतमस्तक हैं हम पा के उसी परमात्मा को अपनी आत्मा में।
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साधना

जीवन ही है एक पूजा, इससे बड़ा न तप कोई है दूजा,
इसमें सत्य ही है साध्य और सत्य ही है साधना, इसकी ही करनी है हर क्षण हमे उपासना,
भले ही इस पथ पर पग में कितने ही कांटे चुभे या कंकड़, सहेंगे हर दर्द हम हंस कर,
कड़कड़ाती सर्द हवाओं में जम कर या फिर चिलचिलाती धूप में तप कर, हम पहुंचेंगे ही एक न एक दिन प्रभु के दर पर,
इश्वर की दिव्य छांव में, मरहम लगेगा हमारे हर एक घाव में, और भरेगा हर ज़ख्म इन रूहानी फ़िज़ाओं में,
जो कोई भी आयगा यहाँ ले के भीगी पलकें और होटों पे प्यास, पूरी होगी उसकी हर अधूरी आस,
यहाँ होगा जो हमारा और प्रभु का मिलन, तो न होगा दोबारा इसमें कभी भी कोई भी विघटन,
यहाँ मिलेगा हर भटके को सहारा, हर डूबते को किनारा, क्योंकी, यही है एक मात्र सच्चा आसरा हमारा,
सच तो यह है, की, यहाँ मिलेगी हमे वह राहत, जिसकी थी हमे जन्मों से चाहत।
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आमना-सामना

जीवन में जब भी कोई चुनौती हमसे रूबरू होती है तब बस इतनी सी बात समझ लेनी चाहिए की शायद अब वह घड़ी आ गई है जब हमारा खुद से खुद का सामना होना है। हर समस्या हमारी कमज़ोरियों से हमे परिचित करवाती है। हर नई उलझन हमे हमारी सीमा दिखाती है। ऐसे ही मुश्किल से मुश्किल हालात का हम तभी मुकाबला कर सकते हैं जब हम अपनी इन सीमाओं के पार जाएं। और जैसे-जैसे हम अपनी सीमाओं पर जीत हासिल करते जाते हैं, उन पर विजय प्राप्त कर उनको पीछे छोड़े जाते हैं, वैसे-वैसे ही हम ईश्वर के निकट से निकटतम पहुंचते जाते हैं, क्योंकि, जब हम साहस व हिम्मत से हालातों का मुकाबला करने के लिए पहला कदम उठाते हैं बस उसी क्षण प्रभु हमारी ओर दोगुने कदम बढ़ाते हैं। जब हम हर कठिन से कठिन व अप्रत्याशित परिस्थिति का सामना करने के लिए आगे बढ़ते हैं, तब न सिर्फ हमारी मुलाकात अपनेआप से होती है, वरन, हमारे ही भीतर विद्यमान ईश्वर से भी हमारी पहचान होने लगती है, जिन्हें हम दुनियादारी और संसारिक्ता के कुचक्र में फ़ंस कर कहीं भुलाए बैठे हैं। हर कठिनाई वास्तव में आती ही है हमारा हमारे परमपिता से पुनः मिलन कराने के लिए। इसीलिए, हर परिस्थिति में हमे ईश्वर पर विश्वास बनाए रखना चाहिए और आज से, अभी से, हमे खुद से यह वादा करना चाहिए की, ज़िंदगी में हर चुनौति को सदैव ही हम एक स्व-निर्माण के अवसर में परिवर्तित कर आगे चलते -चलेंगे, बढ़ते- बढ़ेंगे।
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सच्ची बातें

कह गए सयाने……..
……..मन जीते जग जीते……
……. जो जितना अंतर्मुखी वह उतना सुखी, जो जितना बाहरमुखी वह उतना दुखी…….
……..हमारी हर समस्या का समाधान हमारे ही पास है, औरों के पास तो बस सुझाव है……..
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Afternoon Affirmation

The true test of being centered within is our ability to be completely aware and awakened in the present moment, free from the burdens of the past and the speculations of the future. The past is very well gone and the future has not yet come, whereas, the present is right here right now. The present is our only chance to improve ourselves and to work upon the beterment of our lives. To be awakened in the present helps us feel light and relaxed relieved of the unnecessary baggage of the past sorrows and of the future anxieties and makes life an enriching and creative journey. Being receptive of the present moment helps us give our 100% to it and live every moment to its fullest. And gradually life becomes a very fulfilling experience. Though, this practice requires patience and perseverance, the mere effort is so rewarding, that it in itself becomes a source of inspiration thus never letting us fall short of motivation to keep us going. Hence, let’s resolve never again to regret the present as a lost opportunity by being absolutely alive to it in all our vigor and vitality. The capacity to completely focus all our energies on the present moment is our ability to stay anchored in the Divine. And gradually, getting us closer and closer to the Almighty. So, from now on let us all pass the test of being centred within with full and flying colours!
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One Good Day!

21 June- World Music Day and International Day of Yoga -
धूप छाँव

दुख की धूप में ही तप कर सोना कुन्दन है बनता,
सुख की छाँव में तो कभी कुछ भी नहीं है बदलता,
विपदाओं व चुनौतियों में ही बहुत कुछ सीखने को हमे है मिलता,
और यूं ही तो हमारी आत्मा का यह फूल है खिलता।
इस दुख की धूप में ही तो आत्मा का दीप है जलता,
सुख की छाँव में थोड़ी न यह दीप कभी भी है चमकता,
और जो एक बार यह सूरज है निकलता, तो फिर यह दोबारा कभी नहीं है ढलता।
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देव दीप

……..हृदय का फूल खिलता है तो कड़ी धूप में भी नहीं मुर्झाता……..
………अंतर्दृष्टि के नयन खुलते हैं तो फिर रात दोबारा कभी नहीं आती…….
……..आत्मा का हीरा चमकता है तो अंधकार में भी हर कण-कण, क्षण-क्षण है जगमगाता…….
………अंतर्मन का दीप जलता है तो कोई आंधी इसे बुझा नहीं पाती…….
……..विश्वास, ज्ञान, स्वाध्याय व सतसंग का मार्ग हमें इस लक्ष्य तक है ले आता……..