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अमर दीप
जब बाहर कुप अंधेरा हो, तब अपनी अंतर्दृष्टि के दीप जलाओ, अपनी आत्मा के चिराग जगाओ, अपने मन के अंधकार मिटाओ, अंदर के प्रकाश से बाहर के लुप्त रास्तों में उजाले फैलाओ, खुद भी देखो और अन्यों को भी मार्ग दिखाओ, स्वदीप बन स्वयं जगमगाओ और इस जग-जगत को भी रौशन बनाओ।
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दया और दुआ
कांटों मे ही फूल खिलते हैं, रातों में ही तारे दिखते हैं, धुंधयारों से हो कर उजियारे मिलते हैं, अंधेरों मे ही विश्वास के दीप जलते हैं, कठिनाइयों मे ईश्वर हर पल हमारे साथ चलते हैं, यूं ही हम औरों के भी दुख-दर्द समझते हैं, मन में सब के लिए दया-करूणा के मोती बसते हैं,…
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कुछ फूल कुछ कांटे
सब चीज़ें हमेशा अपने बस में नहीं होती, हर किसी की अपनी कुछ बेबसी कूछ लाचारी ज़रूर ही है होती, यह समझना ही तो दोस्ती के हैं अनमोल मोती, शुभचिंतकों के मन में एक-दसरे के लिए दुआओं की कलियां महकती हैं हमेशा ही छोटी-छोटी, करूना की किरने लाती है अंधकार में ज्योति, हर किसी की…
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अंधेरे उजाले
अंधियारों का उजियारा, डूबतों का किनारा, भटकों का रखवाला, बेबसों का सहारा, डबडबाती नज़रों का सितारा, हर एक जो है मायूसियों का मारा और उदासियों से हारा, ग़म न कर, ईश्वर जानता है हर सुख-दुख हमारा, वो ही है एक मात्र सच्चा सबका सहारा और कर ही देगा वो एक दिन सब हिसाब-किताब बराबर सारा,…
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मोती-मनके
सत्य की अग्नि में जल कर ही सोना कुन्दन बनता है, सत्य की आँच में तप कर ही कोयला हीरा बन निखरता है, सत्य के सागर से हो कर ही सीप से मोती निकलता है, सत्य की रेत में दब कर ही पत्थर मणी-मनकों का रूप ले उभरता हैं। सत्य की उपासना करें, सत्य को…
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हीरे – मोती
आंसू …….जो गिर जाए सो बून्द, जो रूक जाए सो मोती……. ……..जो बह जाए सो धूल, जो थम जाए सो फूल………. …….जो छलक जाए सो बाती, जो ठहर जाए सो ज्योति…. …….जो बिखर जाए सो शूल, जो सिमट जाए सो शबनम, …….जो बह जाए सो अंगारे, जो रह जाए सो कलियां छोटी-छोटी……. …….जो निकल जाए…