• पलछिन

    रातें इतनी लम्बी न हों की सवेरा होने न पाए,

    फ़ासले इतने ज़्यादा न हों की कभी मिटने न पाए,

    खाई इतनी गहरी न हो की फिर भरने न पाए,

    दूरी इतनी न हो की किनारे कहीं मिलने न पाए,

    वक्त इतना लम्बा न हो की कभी मुड़ने न पाए,

    जान के अनजान इतना न बनें की कभी फिर जान-पहचान होने न पाए,

    ……..इसीलिए, आओ, आज दोस्ती का हाथ बढ़ाए, सबसे मिले-मिलाए

    सबका साथ निभाए, एक-दूसरे का हाथ बटाए वरना, कहीं यूं न हो, की फिर अफसोस इतना हो की जन्मों सहने न पाए………

  • जीवन अनुभव

    जो स्वयं पर विजय प्राप्त करते हैं, वे ईश्वर का सानिध्य प्राप्त करते हैं……

    जब ध्यान संसार से हटता है, तब भगवान में स्वतः ही लगता है…….

    संसार में इच्छाएं जितनी बुझती हैं, प्यास उतनी ही बढ़ती है, प्रभु के घर में तृप्ति की वर्षा बरसती है…..

    जब हम स्वयं को एकांत में खोते हैं, तब ईश्वर हमारे साथ होते हैं, और अब के बाद हम एक से अनन्त बन, परिपूर्ण होते हैं …..

  • The Journey

    We are always looking forward to traveling to a new place, always excited about discovering new things and meeting new people. But have we ever tried to travel within, to get to know ourselves, discover who we really are and why we are here? Have we ever wanted to know the true purpose of our lives? Sometimes, we must look within, spend some time with ourselves away from the chaos of the world. This will give us a perspective on the world outside and help us become familiar with the world which is within us. This solitude will bring peace into our lives and help us live a more meaningful life. This is a journey from sound to silence. This is a journey from confusion to contemplation finally leading to lasting fulfillment. It might seem daunting in the beginning, but as we continue to take small steps it will open a whole new world of joy and contentment leading us ultimately to the real aim of our lives, that is to be one with our Divine Father for now and always.

  • A Prayer

    Dear God give us the strength to walk on your path, to answer the call within, to face our fear with courage, to be on the side of the Truth with conviction, prepare ourselves with devotion for the Redemption you want to grant us in all your mercy and with faith do what we are truly here for.

    Grant us pardon and salvation.

    Always humbly yours in service and surrender to your Divine Will.

  • कुछ नया कुछ पुराना

    रिश्तों का यह जो ताना-बाना है, जन्मों का यह तो बंधन पुराना है,

    यूंही नहीं किसी का आना और किसी का जाना है,

    कोई अपना अनजाना, तो कोई बेगाना जाना-पहचाना है,

    किसी का दो कदम चल के छूट जाना है, और किसी का तो दूर तक साथ निभाना है,

    जीवन के इस मेले में जहाँ कभी विरह, तो कभी मिलना-मिलाना है,

    वहाँ एक ही तो अपना शाश्वत ठिकाना है, यहीं पर शीश झुकाना है, विश्वास का अमर दीप जलाना है,

    क्योंकि, यही तो हैं वो, जो सदा ही हमारे साथ थे, हैं और सब के चले जाने के बाद भी इन्हीं को तो हमारे पास रह जाना है।

  • जीवनपर्यंत

  • Fly High

  • तारों की छांव में

    सागर की लहरें, आसमान के तारे, पेड़ों के पत्ते,

    हवाओं के वेग, माटी की खुशबू, फूलों की सुगंध,

    सूरज की गर्मी, चन्द्रमा की ठण्डक, आकाश की विशालता,

    ……..यह सभी ईश्वर की कृतियां हैं, और इन सभी कृतियों के यह दिव्य गुण हैं, जिनका हम वास्स्तविक स्पर्श नहीं कर सकते, गिन नहीं सकते, तौल नहीं सकते, माप नहीं सकते, अपितु, इनका अनुभव अवश्य कर सकते हैं। ठीक इसी प्रकार, जब हम संसार के प्रपंच और प्रदूषण से खुद को मुक्त कर लेते हैं, तब हम, शुद्ध अंतःकरण से ईश्वर की दया, कृपा और उपस्थिति की अनुभूति कर पाते हैं। जीवन में यूं भी कभी होता है, की हम जब स्वयं को अकेले व असहाय पाते हैं, तब प्रभु ही हमारी सबसे बड़ी शक्ति व सहारा बन के सामने आते हैं, वे ही हमे हर समस्या और परिस्थिति से निबटने का साहस व सूझबूझ प्रदान करते हैं, जिससे शायद हम पहले परिचत न थे, और यूं अपने जीवन में हमे ईश्वर की उपस्थिती का एक और सजीव उदाहरण मिलता है।

    एक शाश्वत सत्य यह भी है, की, प्रभु की इन पवित्र अनुभूतियों से व अमूर्त उपस्थिती से ही हम हैं, यह कायनात है, और यह नहीं, तो कोई नहीं, कुछ नहीं।

  • The Meaning

  • विहान

    जब-जब हम ज़रूरतमंदो की मदद के लिए अपने हाथ आगे बढ़ाते हैं, असल में तब- तब, हम उपर वाले की इबादत में ही अपने हाथ ऊपर उठाते हैं …….

    अपनी हर कमज़ोरी, बुराई, निम्नता का त्याग करना ही प्रभु के चरणों के लिए सर्वश्रेष्ठ भेंट हैं, यही तो है वह बलिदान जो ईश्वर को लगता है अति मूल्यवान…..

    ईश्वर की वास्तविक भक्ति तब होती है ,जब हम आज में, अभी में, जीते हैं, अपने सभी पूर्वाग्रहों व अनुमानों से मुक्त हो के ही हम प्रभु का सच्चा अनुभव कर पाते हैं, और यूंही भन में एक दिव्य ज्योति प्रज्वलित होती है ……..

    कहते हैं, जो लोग ज़्यादा डरते हैं, वह ईश्वर में विश्वास कुछ कम रखते हैं ……..

    जब खुद से खुद की हुई रिहाई, तब कहीं जा के रूहानी पनाह पाई ………