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जीवन धारा

……ऊँची पहाड़ियों से झरना बन गिरना हो या संकरी गलियों से सिमट कर गुज़रना हो,
……..बारिश की तरह आकाश से छम-छम बरसना हो या ओस की बून्द बन फूलों पर बिखरना हो,
…….अनजान राहों से होते हुए सागर से मिलना हो या कुएं में रह कर सबका पोषण करना हो,
…… यह तो जल-जीवन है, यह कहीं रूकता नहीं, थमता नहीं, यूं ही निरंतर चलता रहता है, रूप-आकार बदलता रहता है,
…….जल हो या जीवन ठहरेगा या थमेगा, तो फिर वह न सिर्फ अनुपयोगी और बोझिल बन जाएगा वरन अपने और अन्यों के लिए हानिकारक भी हो जाएगा,
……..इसीलिए, जीवन में सदा ही बढ़ते रहें और बहते रहें, जीवन का यही आधार है, हमेशा ही चलायमान व प्रवाहमान बने रहने से ही जीवन में जान है और जल में प्राण है।
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A Few Good Things

Never say what you do not mean, and always mean what you say.
No point in blaming God for all our woes and worries, it’s just our own Karma coming back to us, infact, God is our only support and succor at such times.
Face facts. Accept truths, in all its glory and grime, it helps make life simple, hassle free and peaceful.
Go with the flow. Everything is in a state of flux. It keeps us from stagnating and full of verve and vibrancy.
Always keep learning, growing and evolving, it helps us realize our best potential.
Be the Spring of your Life, constantly renew and revive from the whites of the winters to the greens of the summers.
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Silence, The Song Divine

Silence is the medium through which God speaks. We should learn to listen to Silence. It will heal the body, mind and soul. We must try to maintain inner as well as outer Silence to experience the Power of Silence. Silence helps us establish a link of quiet communion with the Almighty. Therefore, we should chant the Mantra of Silence at all times and for all rhymes.
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We Belong

We are not just a part of a community, but all are tied together with a common thread of Humanity, and ultimately all of us truly belong to an All Abiding Divinity.
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एकांत

जब एक और अनंत मिल जाते हैं तो एकाकीपन का अंत हो जाता है और हम एक सन्तुष्ट और सम्पूर्ण एकांत को प्राप्त करते हैं।
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सफरनामा

सफर शुरु हुआ है तो मंज़िल भी ज़रूर मिलेगी, हाँ मगर इस में दिन भी ढलेगा और कभी सायों की खामोशियां भी मिलेगी, ऐसी घटाएं तो सफर में बरसती ही रहेगी, यह हवाएं तो यूंही हरदम चलती ही चलेगी, पर मंज़िल की डोर हम से मज़बूती से बंधी रहेगी, और एक रोज़ फिर दोबारा धूप भी ज़रूर खिलेगी।
सफर में भले ही हो हर ओर घनेरे जंगल या कितने ही गहरे क्यों न हो यह समंदर, हौसले और हिम्मत से टिकी है मंज़िल पर हमारी नज़र, तूफानों से घिरे हों या जा टकराएं ऊंचे पहाड़ों पर, इन्हीं राहों पर चलते रहेंगे हम यूंही निडर और निरंतर, और एक न एक दिन पा ही लेंगे हम अपनी मंज़िल और ज़रूर ही देखेंगे अपने ख्वाबों का वह सुहाना मंज़र।
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विचार संगम

सुख-दुख के ऊंचे-नीचे रास्तों से गुज़र कर ही हम सत्य के शिखर तक पहुँचते हैं।
जो कुछ करना है सो अभी ही कर लें, कहीं ऐसा न हो, की कल को बचाने के लिए कुछ बचे ही नहीं।
बदला न लें, आप ही बदल जाएं, यह दुनिया खुद- ही- खुद बदली-बदली सी लगेगी।
किसी की खुशी का कारण बनें, अपना मन स्वतः खुशी से भर जाएगा।
जीवन में कंकड़-पत्थरों का ढेर न लगने दें, चंद अनमोल रत्न ही अपने आस-पास रहने दें।
लौकिक अस्तित्व से भिन्न हमारा एक अलौकिक स्वरूप भी है, इसे भी पहचानने की चेष्टा करें, स्वयं को अपनी सम्पूर्णता मे जानने का प्रयास करें।
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होली की हार्दिक शुभकामनाएं

इस होली हम कुछ नया करेंगे, इस होली हम एक नए मित्र से मिलेंगे।
अब की होली हम ईश्वर संग मनाएंगे, अपनी भक्ति का रंग उन्हें लगाएंगे।
आज हम अपनी आत्मा पर प्रभु प्रेम का रंग चढ़ाएंगे, आज हम प्रभु को अपने मन और घर लाएंगे।
यह होली कुछ खास बनाएं, आज एक दिव्य होली मनाएं। होली की अनेको शुभकामनाएं।
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होली मुबारक

सुख और दुख, ग़म और खुशी, पाना और खोना, आशा और निराशा, हँसी और मायूसी, यह सभी जीवन के भिन्न-भिन्न रंग हैं। इन्हीं रंगो से मिल कर यह जीवन बनता है। हर रंग को जानिए, हर रंग को पहचानिए। हर रंग को अपनाइये, हर रंग से सीखिए और सिखाइये। और इन्ही रंगो के रंग में रंग के जीवन को रंग-बिरंगा और खुशनुमा बनाइये, होली मनाइये। होली मुबारक।
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प्रार्थना

सर पे कड़कती धूप हो या हो ठण्डी छांव, फूल पे पड़े या कांटों से छिले हों अपने पाँव, आंधियों से घिरी हो या शांत किनारे लगी हो अपनी नाव……..हमें है न कोई डर, न कोई फिकर, क्योंकि इस बात की है हमे सच्ची खबर की……..हमारे सर पे है तेरा हाथ, हर क्षण है तेरा साथ, तो फिर भय की है न कोई बात, तू सम्भालेगा हमे, चाहे जैसे भी क्यों न हो हालात…….. हे ईश्वर, यूं ही तू हम पे अपनी अनुकम्पा बनाए रखना, हम चाहे कितनी ही क्यों न करें भूल तू सदा ही हमे क्षमा करते रहना, हमे अपना नादान बालक जान ऐसे ही हमेशा हमारे साथ बस चलते चलना।