• The Call Beyond

    Dear God is beyond…….. land, sea and the sky……..time space and the universe…….. past, present and the future……… people, event and the world……..you, me and the other…….. so, hold on to God, right and proper, if you must, and to none another, now and forever.

  • कुछ तेरे लिए कुछ मेरे लिए

    यह दुनिया तो पल-पल बदलती ही रहती है। यहाँ लोगों का आना-जाना तो नित लगा ही रहता है। इसीलिए, चाहे किसी की भी नज़रों में गिरना पर कभी भी अपनी नज़रों में न गिरना, क्योंकि, हम हमेशा ही अपने साथ रहते हैं और अपने कर्मों का हिसाब- किताब हमे अकेले ही चुकाना होता है न की किसी अन्य को।

    अपनी त्रुटि सहजता से स्वीकार करना और विनम्रतापूर्वक क्षमा मांग लेना हमारे बड़प्पन और उदारता का प्रमाण होता है न की हमारे किसी खोट या दोष का। ऐसा करने से हमारा मन तो हल्का होता ही है, दूसरों के लिए एक नेक उदाहरण स्थापित होता है और साथ ही साथ हम सबके आदर व सम्मान के योग्य पात्र भी सिद्ध होते हैं।

    प्रकृति जिन पंचमहाभूत से निर्मित है हम भी उसी पंचतत्व से बने हैं। जब हम प्रकृति को नष्ट करते हैं तब हम अपने ही विनाश की ओर तीव्रता से बढ़ते हैं। प्रकृति का विध्वंस सम्पूर्ण मानव जाति व सभ्यता के लिए न सिर्फ घातक है बल्कि इसके पीड़ादायक व दुखदाई अंत की शुरुआत है। इसलिए, प्रकृति की रक्षा व संरक्षण प्रकृति के लिए नहीं तो न सही हमे अपने हित के लिए तो करनी ही चाहिए।

  • Power To You!

    An oft repeated maxim, for one and all and from one to all, face your fears! Easier said than done! But once done, there is absolutely no looking back. One only goes from better to best. Conquering our fears strengthens us. Defeating our weaknesses empowers us and enables us to live our life to the best and the fullest. Facing our demons, beating them, and going beyond them, releases and liberates us.

    It is one of the purposes of our existence to vanquish our fears. It brings us closer to the Divine. Placing complete Faith in the Almighty when we step forth into the unknown, then God himself becomes our Guiding Light. Paths get discovered hithero undisclosed to us. Doors are opened where none existed before. Help pours in from the most unexpected quarters. On the way, we also realize hidden reservoirs of courage and resilience within ourselves of which we were previously oblivious. Here all that is to be done is to take the first step with conviction and confidence in the Divine. From here on He will lead the way from fear and fright to freedom and light.

    P.S. Faith is the only remedy to fear.

  • संगम

    जीवन अंधकार और प्रकाश का खेल है, सांझ और सवेरे का यह मेल है,

    इस बगिया में कांटों संग फूल हैं, यहाँ होते हर दम संग शबनम और शूल हैं,

    कभी अमावस तो कभी चाँदनी रात है, जीवन में जलना-बुझना सदा ही एक साथ है,

    पतझड़ लाती हमेशा अपने आंचल में बहार है, आखिर, ऐसे ही संगम से तो होता जीवन का श्रृंगार है।

  • तारे सितारे

    दूसरों से हटा के अपना ध्यान स्वयं पर केंद्रित करें। कुछ नया सीखें, किसी बुरी आदत को छोड़ें, कोई नई व अच्छी आदत को अपनाएं। एक नवीन संकल्प लें। इसकी धारना और साधना में अपनी उर्जा को अर्जित करें। कोई भी सब कुछ नहीं कर सकता, इसलिए, किसी एक ऐसे सतगुण को अपनाए व उसका अभ्यास करें जो आपके लिए उचित व उपयोगी साबित हो। ऐसा करने से हमारी शक्ति सही दिशा में विकसित होगी, मन का भटकाव कम होगा और एकाग्रता बढ़ेगी साथ ही साथ जीवन में सकारात्मक बदलाव आने शुर हो जाएंगे।

    मैं, मेरा और मैंने को जब हम आवश्यकता से अधिक महत्व देने लगते हैं तब हम अपना ही नुकसान कर बैठते हैं। यह आदत एक ऐसे विष के समान है जो हमे ही अन्दर से खोखला बना देती है। इससे हम मजबूत तो नहीं कमज़ोर ज़रूर होते चले जाते हैं। हम जब दूसरों को मान्यता देते हैं ,उनकी सराहना करते हैं या उचित श्रेय देते हैं तब हम स्वयं भी प्रसन्नता का पुरस्कार पाते हैं। किसी का उदार मन से आदर करने से हम स्वयं भी आदर के योग्य बन जाते हैं।

    कभी किसी की नेकी को उसकी कमज़ोरी समझने की भूल कतई नहीं करनी चाहिए, ऐसा करने के स्थान पर, उनसे कुछ सीख के व प्रेरणा ले के हमें स्वयं भी कुछ अच्छा करने का प्रयास करना चाहिए। ऐसा करने से हमे सुखद अनुभूति होगी और हम स्वयं से प्रसन्न रहने लगेंगे।

    कभी भी किसी व्यक्ति, वस्तु या स्थान की शरण न लीजिए। यह सब तो आज हैं जाने कल हों न हों। सिर्फ प्रभु शरण आ कर ही हम स्थाई, स्थिर व सम्पूर्ण तृप्ति का दान प्राप्त कर सकते हैं। ईश्वर ही ढूढ़ सन्तोष व अचल शांति के एक मात्र स्त्रोत हैं। यहाँ कोई ऊँच-नीच नहीं, कोई भेद-भाव नहीं, यह तो अटूट विश्वास व आस्था से बंधी आत्मा और परमात्मा की अलौकिक डोर है, यहाँ जो कोई आता है वह अपनी उम्मीदों और अनुमान से कई गुना अधिक ही पाता है।

    मन को निश्चल, ह्रदय को निर्मल, बुद्धि को पावन और आत्मा को परमात्मा का अंश जान कर ही किसी दैवीय गतिविधी या यात्रा का आरंभ करना चाहिए। ऐसे पवित्र प्रयास से ही हम दैविक स्थानों के दर्शन योग्य बनते हैं और धार्मिक कार्यों से प्राप्त होने वाले ईश्वरीय अनुकम्पा के लायक होते हैं, अन्यथा हमारे सभी प्रयत्न औपचारिकता मात्र ही हो के रह जाते हैं और इनकी मूल दिव्यता और आलौकिक मर्म कहीं सांसारिकता में लुप्त हो जाते हैं।

  • योग सहयोग

    ईश्वर तो निराकार हैं। श्रेष्ठ चढ़ावा भी उन पे फिर निराकार ही होना चाहिए। जैसे, हमारी प्रभु पर अडिग आस्था, कठिन से कठिन परिस्थिति में भी उन पर हमारा अटल विश्वास, घोर उदासी और नउम्मीदी के दौर में भी भगवान पर हमारी असीम श्रद्धा। खुशी, उत्सव व पर्व के अवसर में प्रभु के प्रति हमारे हृदय में सच्चा आभार और कृतज्ञता।

    हाँ मगर, भौतिक दान-दक्षिणा की भी अपनी एहमियत है और इसके महत्व को कतई नकारा नहीं जा सकता है। यह भी उत्तम कोटी का चढ़ावा बन जाता है जब हम इनके साधन से अभावग्रस्त जनों की सहायता करते हैं। उनकी सेवा ही प्रभु की सेवा बन जाती है। हम जब अपना समय, सहानुभूति, वस्तु,धन राशी या फिर अन्य किसी भी वांछित मार्ग से जरूरतमंदों की सहायता करते हैं तब हम प्रभु का दिया ही प्रभु को अर्पित करते हैं। इसी योगदान में हमारा प्रसाद भी निहित है। ऐसे निस्वार्थ दान-प्रदान से हम स्थाई संतोष व शांति का अनुभव करते हैं, साथ ही साथ व्यथित आत्माओं की दुआओं से हमारी झोली भर जाती है और तो और हम ईश्वरीय अनुकम्पा व आशीर्वाद के योग्य पात्र भी बन जाते हैं। ऐसी साझेदारी और सहयोग ही ईश्वर के चरणों में हमारी सर्वोच्च और सर्वोत्तम भेंट बन जाती है।

  • नवकृति

    ढलते हैं जगमगाने के लिए,

    ढहते हैं बंधने के लिए,

    मिटते हैं नवरूप लेने के लिए,

    टूटते हैं बनने के लिए,

    पिघलते हैं सांचे में ढलने के लिए,

    जलते हैं कुन्दन होने के लिए,

    बिगड़ते हैं संवरने के लिए,

    बिखरते हैं निखरने के लिए।

  • कुछ फूल कुछ कांटे

    हम ईश्वर की सुनेंगे तो वे हमारी सुनेंगे, हम उनकी करेंगे तो वे हमारी करेंगे, हम एक कदम बढ़ाएंगे तो वे सौ कदम बढ़ाएंगे।

    हम सभी को अपने भाग्य का भुगतान खुद ही करना है, अकेले आए हैं और अकेले ही जाना है।

    जैसे-जैसे हम पे दुखों के पहाड़ टूटते चले जाते हैं, वैसे- वैसे ही हमारे पापों के बोझ भी कम होते जाते हैं।

    अंधेरी रातों के दीपक, पत्थरिली राहों के फूल, तपती धूप की छांव, तूफानों के किनारे, आंधियों के आश्रय, ईश्वर हर घड़ी, हर क्षण, हर परिस्थिति में हमेशा हमारे साथ हैं।

  • दिव्य दर्शन

    ……….मैं भूखा था, उसने मुझे खाना खिलाया, मैंने उसमें प्रभु को पाया ……..मैं प्यासा था, उसने मुझे पानी पिलाया, मैंने उसमें प्रभु को पाया……… मैं बीमार था, उसने सर पे हाथ फिराया…….. मैंने उसमें प्रभु को पाया…….. मैं उदास था, उसने मुझे खूब हँसाया, मैंने उसमें प्रभु को पाया ……… मैं अकेला था, उसने मेरा साथ निभाया…….. मैंने उसमें प्रभु को पाया………. मैं भटका था, उसने मुझे रास्ता दिखाया……… मैंने उसमें प्रभु को पाया……..

    …………………. आज…….. मैंने प्रभु को पाया।

  • सत्य की शक्ति

    कहते हैं सत्य कड़वा होता है, लेकिन सिर्फ तब तक, जब तक हम उसे स्वीकार नहीं कर लेते, और जब यही सत्य हम अपना लेते हैं तब वही अमृत से भी ज़्यादा मीठा बन जाता है। सत्य स्वीकार कर लेने से अंतर्द्वद्व समाप्त होता है, अन्यों से जूझना व आपसी भिड़ंत से छुटकारा मिलता है, परिस्थिति साफ और स्पष्ट दिखने से समाधान की ओर चल पड़ते हैं, अन्यों की तो पहचान होती ही है खुद से खुद के साक्षात्कार का आरंभ होता है, स्थिती कम पीड़ादायक बन जाती है , साथ ही साथ सत्य स्वीकार कर लेने से आंतरिक व बाहरी शांति का संचार होने लगता है। हर सत्य उस परम सत्य की ही छवि होती है, इसीलिए, हम जब-जब झूठ, गलत, माया, मिथ्या डर,भय से दूर होते चले जाते हैं तब-तब हम उस परम सत्य के पास पहुंचते जाते हैं। जैसे-जैसे हम हर सत्य को स्वीकारते हैं वैसे-वैसे ही वे परम सत्य भी हमे स्वीकारते चले जाते हैं। सत्य को जीना ही सही मायने मे सत्य की सच्ची अराधना है।